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69 साल में देश को पहला ऐसा प्रधानमन्त्री मिला है... जो 35 भाषाओं में गाली सुन रहा है!

गुरुवार, 17 नवंबर 2016 | Admin Desk

लखनऊ : नोट-बंदी को लेकर भड़के लोगों का गुस्‍सा किसी सुनामी से कम नहीं है। तिल का ताड़ बना डालने पर आमादा सोशल-साइट्सकर्ताओं ने तो अपने सारे कारतूस-तीर मारने का बाकायदा अभियान ही छेड़ दिया है। कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोस रहा है, तो राहुलगांधी, केजरीवाल, मायावती, मुलायम सिंह यादव जैसे लोगों को। इन सब नेताओं का साफ मानना है कि भाजपा ने पहले तो सारा पैसा अपनी अंटी पर घुसेड़ लिया है, और उसके बाद नोट-बंदी का ऐलान किया है। लेकिन हैरत की बात है कि आम आदमी ऐसे आरोपों को पूरी तरह खारिज करता दिख रहा है। मुश्किलों में अपनी जिन्‍दगी बिताने वाली आदत को अपना चुके आम आदमी काला धन देश के लिए कलंक और विष ही मानता है। उसका कहना है कि नोट-बंदी का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जो खुद भारी काली कमाई दबाये रखे है।

लेकिन इसके बावजूद मोदी पर ताड़ना, गालियां की बौछारें चल रही हैं। इलाहाबाद के वकील हैं केके राय। उन्‍होंने जमाने भर के वाट्सऐप में चल रही चर्चाओं में से एक को मुझ से शेयर किया है, जिसमें दर्ज है कि:- 69 साल में देश को पहला ऐसा प्रधानमन्त्री मिला है... जो 35 भाषाओं में गाली सुन रहा है!

भोपाल के दैनिक भास्‍कर के मुख्‍य उप सम्‍पादक गौरव पाण्‍डेय ने चुटकी ली:- बदलवा दे मेरे नोट ए ग़ालिब, या वो जगह बता दे, जहां कतार न हो। उमरे दराज़ मांग कर लाये थे चार दिन,  कमाने में लग गए, दो बदलवाने में..गौरव आगे जोड़ते हैं कि हम लोग रोज रोज Dp बदलते है. बापू ने 1 ही बार Dp बदला तो सबका BP बढ गया

गौरव की तीखी नजर सिर्फ मोदी पर ही नहीं, बल्कि राहुल गांधी पर भी है। जरा निहारिये तो:- अब मोदी की हवा नहीं, अब मोदी की आंधी है...क्या ये अच्छे दिन नहीं, की बैंक की कतार में राहुल गांधी है..


एक तो नोट-बंदी के बाद हो रहे हंगामे पर पूरा इतिहास ही खंगाल लिया। लिखा है कि:- दितीय विश्व युद्ध के समय, ब्रिटेन के pm चर्चिल ने सिर्फ एक बार अपील की थी कि आम जनता कृपया अंडे न खरीदे। देश में अंडों की कमी है और अंडे सिर्फ सैनिकों के लिए ही होंगे।

ठीक उसी पल ब्रिटेन की दुकानों पर, लोगों की लंबी लंबी लाइने लग गई ...लेकिन अंडे खरीदने के लिए लाइन नहीं लगी थी बल्कि खरीदे हुए अंडे और घर में रखे अंडे वापस करने की लाइन लगी थी। राष्ट्रप्रेम, कसौटी भी लेता है। ये समय भी चला ही जायेगा, थोड़ा धैर्य रखिये।

अशोक खेमका ने ट्वीट किया कोई भी नीति जनहित में तभी अच्छी होती है जब उसे अच्छी तरह से लागू किया जाए। बड़े नोटों को रद्द करने की योजना का उद्देश्य महान था, लेकिन इसकी प्लानिंग ठीक नहीं थी और योजना को लागू करने का ढंग ढीलाढाला है।

बुलंदशहर को फेसबुक पर बुलंद करते रहने वाले पृथ्‍वी पाल सिंह ने करारा व्‍यंग्‍य फेंका है। उन्‍होंने लिखा है कि:- नोटबँदी पर सारे विधवाविलापिये एकजुट ...विपक्ष बड़ा निखट्टू है।

और आखिर में शाहगंज के देवानंद उपाध्‍याय की भेजी गयी फोटो का जायजा लीजिए, जिसमें लाल किले तक की चढ़ाई का पूरा मुकम्‍मल सफर दर्ज किया गया है।

साभार- लेखक कुमार सौवीर, स्रोत मेरीबिटियाडाटकाम

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