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दीवाली के तत्‍काल बाद होली शुरू, लतियाय-गरियाय जा रहे हैं मोदी

बुधवार, 09 नवंबर 2016 | Admin Desk

लखनऊ : एक वक्‍त हुआ करता था कि एक हजारों की झुण्‍ड-रकम को लोग अपने बच्‍चों के नाम रख दिया करते थे। मसलन, हजारी बाबू, हजारी लाल, हजारी प्रसाद, हजारी-सुत। लेकिन कल शाम जैसे ही इन हजारी और अर्द्ध-हजारी नोटों का हश्र बुरा हुआ, इन नोटों पर लानत-मलामत भेजने की स्‍पीड  इत्‍ती तेज हो गयी, कि मंगल-यान की गति तक फीकी हो जाए। खास तौर पर वे लोग, जो जन्‍मना मोदी-विरोधी हैं, पानी पी-पी कर मोदी को गरियाने में जुट गये हैं। जाहिर है कि यह लोग भाजपा विरोधी खेमे से ही ताल्‍लुक रखते हैं। उधर एक बड़ा खेमा ऐसा भी है जो मोदी के इस फैसले पर वाह-वाही के सारे गेट खोल चुका है। लेकिन ऐसे भी लोगों की संख्‍या कम नहीं है, जो इस पूरे मसले को हास्‍य और व्‍यंग्‍य के तौर पर पेश करते और देख रहे हैं। सोशल साइट्स पर यह हंगामा तो खासा तेज है।

मेरी बिटिया डॉट कॉम की टीम ने इस मसले पर खोजबीन शुरू की। गूगल प्‍लस में दिलीप शर्मा ले लिखा है कि :- सरासर चीटिंग है। काला धन बाहर से लाने को कहा था ये तो अंदर का निकाल रहे हैं। बनारस के चुक्‍कड़ त्रिलोचन शास्‍त्री बोले:- सर्जिकल स्ट्राइक कम कीमोथेरेपी ज्यादा लग रही है। रोग दूर हो न हो, गंजा जरूर करेगी। जबकि ठेलुआ-राज्‍य के राजाधिराज चंचल भूजी जी

ने एक झटके में चीत्‍कार कर दिया। बड़ी दर्दनाक आवाज निकली: - एक झटके में पूरा देश कंगाल हो गया । लेकिन इसके बावजूद भूजी जी ने सच का दामन नहीं छोड़ा। लिख मारा कि:- देश की सबसे बड़ी दलित महिला का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है ।

मुरादाबाद की रहने वाली डॉ कांति शिखा ने लिखा है कि:-  तोड़नी पड़ी बिटिया की गुल्लक.....! पहले झगड़ती रहीं, अब बैठी रो रही हैं...कैसे समझाऊँ कि 500-1000 के नोट बेकार हो गये...! एक अन्‍य पोस्‍ट में कांति ने लिखा है:- एक बात याद रखना...कभी किसी को छोटा मत समझना....!!-100 का नोट

ग्‍वालियर की अनिता सिकरवार इस मसले पर फीलिंग क्रेजी हैं। लिखती हैं कि:- कालेधन वालों रोना नहीं, धीरज से काम लो |एक उपाय है, दान कभी किया नहीं होगा | तो जाओ 500-1000 के नोट गरीबों में दान कर दो। आपके हाथ से दान का दान हो जायेगा | और कुछ करीब बैंको से बदलवा कर सही उपयोग कर लेगे। दान तो पक्का लगेगा ही अभी भगवान् जी ने अवेध नहीं किये है नोट

बनारसी  निठल्‍ला चिंतक-श्रेष्‍ठ त्रिलोचन शास्‍त्री बड़बड़ा रहे हैं कि :

बयान प्रेमी का-

तेरे उन दस्ते-गुरवत को

जो 'पहुँची' हमने भेजी है

अगर पहुँची हो वह पहुँची

तो लिख भेजो की पहुँची है

जवाब प्रेमिका का-

नहीं पहुँची तेरी पहुँची

लबों तक जान आ पहुँची

कब्र के बाद गर पहुँची

तो वह पहुँची भी क्या पहुँची

पहुँची = बाजूबंद/पंद्रह लाख का नोट

कन्‍नौजी पुलिसवाले आमोद कुमार सिंह लिखते हैं कि :- PM मोदी की अगली संभावित घोषणा,जिन बंधुओं की पत्नी 5 साल से ज्यादा पुरानी हैं, वो तत्काल उनके मायके में जमा कराकर नयी प्राप्त करें।

गाजियाबाद के अनुवादक-पत्रकार संजय कुमार सिंह का अंदाज देखिये:- अब तो मैं भक्त हुआ। एक अन्‍य पोस्‍ट में चंचल भूजी जी ने मस्‍त बात लिखी है। बोले:-

हल्ला हमारे घर में भी है , लोग खोज खोजकर नोट निकाल रहे हैं । हम चैन से बैठे हैं ,अरसा हुआ नोट पकडे हुए । संग्रह का तो सवाल ही नही । आज अपनी मुफलिसी का कायल हुआ हूँ। बाजार में चौराहों पर परेशान चेहरों को निहार रहा हूँ । बुधना के माई बकरी बेच के तीन हजार खूंट में गाठिया के रखी रही , बैंक तक भाग के आयी पर बंद । ये लंमरदार ! देवर ! अब ई नोट ना चली ?

- ना चली

- त , का करी एकर ?

- एकर बत्ती बनाय के भौजाई

और दोनों ने फिस्स से हँस दिया ।

सहनशीलता , संयम और सामर्थ्य आज भी गांव में है ,

जौनपुर के सर्राफ संजय कुमार सेठ ने सिर्फ छह शब्‍द में व्‍यक्‍त किया है:- ये है 56 इंच का कमाल

छपरा-रांची के पत्रकार मुकुन्द हरि शुक्ल फरमाते हैं कि:- अब देखना होगा कि अगले कुछ घंटों में 500 और 1000 के अघोषित नोटों की कीमत कितने कमीशन पर तय होती है।शेयर बाजार का तो हाल बेहाल हो सकता है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा में रह चुके देवेंद्रनाथ दुबे ने लिखा है कि:-  भारत सरकार ने कल रात्रि जो निर्णय लिया उससे एक सुखद अनुभूति हो रही है। कमसे काम कुछ समय तक तो कानून का पालन करने वाले को बेचारगी की स्थिति से उबर कर आने का अवसर मिलेगा। और शायद राजनीति /चुनाव में भ्रष्ट के अतिरिक्त सही व्यक्ति भी आ सकेँगे और यदि शासक वर्ग बेहतर होगा तो देश भी आगे बढ़ेगा।

लखनऊ की पत्रकार मंजू श्रीवास्‍तव का कहना है कि :- अब तो मुझे अपनी गुललक भी तोड़नी पड़ेगी। जो कितने सालों से छुपा कर रखी है। उधर कानपुर के शैलेश प्रताप सिंह ने लिखा है कि:- इस सर्जिकल स्ट्राइक का असर घर पर भी दिख रहा है.. बहुत देर से पत्नी व्यस्त है अपने कमरे मे...

बदायूं में पुलिस की नौकरी कर रहे कमलेश सिंह का दर्द बूझिये तो आप सीधे उनके पैत्रिक गांव मऊ पहुंच जाएंगे:- मेरी बीबी बोलती थी कि जहर खाने तक के लिए एक रुपया नही है

आज बोलती हैं कि आप के पैकेट से निकले 34000 रुपये हैं क्या करूँ । चोर कही की मर् अब

बनारस की शिक्षिका ज्‍योति सिंह ने खूब चुटकी ली। लिखा:- काला धन चारो खाना चित्त ! 15 लाख अपने अपने हिस्से का रख लो !नई दिल्‍ली के आशीष शांडिल्‍य ने लिखा है कि

बिहार के बरबीघा में 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के कारण तीन साहूकारों की हर्ट अटैक से मौत हो गयी है।

जौनपुर के बदलापुर निवासी सुजीत श्रीवास्‍तव ने किसी स्‍त्री गुप्‍तांग का जिक्र करते हुए चुनौती दी है कि :- अब नापो ....वालों....। पूरे 5 सौ 56 इंच हैं। एक सूत भी कम नही।

सभार- लेखक कुमार सौवीर, स्रोत मेरीबिटियाडाटकाम

 

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