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जिले के सभी निकायों पर मुकाबला त्रिकोणीय, दिग्‍गजों की प्रतिष्‍ठा दांव पर

रविवार, 12 नवंबर 2017 | Admin Desk

गाजीपुर। जिले की 3 नगर पालिका परिषद और 5 नगर पंचायत परिषद के लिए आगामी 22 नवम्बर को चुनाव होना है। गाजीपुर में नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किये जा चुके हैं। गाजीपुर की 3 नगर पालिकाओं और 5 नगर पंचायतों के अध्यक्ष पदों के लिए कुल 66 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव को लेकर सभी प्रमुख सियासी दल अपने अपने समीकरण बनाने में जुटे हुये हैं। लेकिन नगर निकाय चुनाव में जनता बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय मुद्दों को लेकर वोटिंग का मूड बना रही है।


जिले की सबसे बड़ी नगर पालिका परिषद गाजीपुर के अध्यक्ष पद पर पिछले दो दशकों से बीजेपी का कब्जा रहा है। जबकि जिले की जमानियां नगर पालिका अध्यक्ष पद पर निर्दलीय और मोहम्मदाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कौमी एकता दल के उम्मीदवार पिछला चुनाव जीते। इसी तरह 5 नगर पंचायत परिषदों में से सादात नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर बीजेपी,जबकि बाकी सैदपुर, दिलदारनगर, जंगीपुर, वहादुरगंज के अध्यक्ष पद पर कौमी एकता दल ने बाजी मारी थी। वर्तमान में कौमी एकता दल का बसपा में विलय हो चुका है। इस बार के चुनाव में बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस अपने अपने सिम्बल पर चुनाव लड़ रही है। जिसके चलते नये राजनैतिक समीकरण उभर कर सामने आने की संभावना है।


गाजीपुर की 3 नगर पालिका परिषदों और 5 नगर पंचायतों के लिए बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं। सभी सियासी दल पालिकाओं और पंचायत अध्यक्षों की कुर्सी पर काबिज होने के लिए सियासी दांव पेंच में जुटी हुई है। सियासी दलों और तमाम उम्मीदवारों की ओर से वोटरों को लुभाने के लिए चाहे जो दावे हो रहे हो। लेकिन आम लोग इलाके के विकास, बुनियादी सुविधाओं और जन समस्याओं के प्रति गंभीरता बरतने वाले नेताओं को ही अपना प्रतिनिधि बनाने के मूड में नजर आ रहें है।

जिले में नगर निकाय चुनाव के पिछले आंकड़ो पर नजर रखे तो कौमी एकता दल के बसपा में विलय होने के बाद से मुख्य मुकाबला बीजेपी और बसपा के बीच नजर आ रहा है। लेकिन सभी नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में सपा पूरे दमखम के साथ चुनावी दंगल में उतर कर चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। चुनाव में सियासी और जातीय समीकरणों पर भी सभी दलों की खास नजर है।लेकिन बावजूद इसके आम जनता विकास और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे पर खुद को फोकस कर रही है.इतना ही नही प्रत्याशी की छवि और जन समस्याओं के प्रति उसकी गंभीरता भी वोटरों की कसौटी पर है।

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