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विश्व होम्योपैथिक दिवस के रूप में मनाया गया हैनिमन का 263 वां जयंती समारोह

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 | Admin Desk

मीरजापुर | स्वास्थ्य के प्रति सजग इंसान रोगों से छुटकारा पाना चाहता है तो धैर्यता के साथ होम्योपैथिक सबसे सटीक पद्धति हैं | जो एक रोग के साथ ही उससे जुड़े अन्य होने वाले रोगों को भी समाप्त कर देती हैं | यह उदगार 263 वां हैनिमन जयंती समारोह पर होम्योपैथिक एसोसिएशन के तत्वावधान में लालडिग्गी स्थित राजश्री स्मृति भवन में आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने मुख्य अतिथि पद से व्यक्त किया | कहा कि उनका पूरा परिवार कई पीढ़ी से होम्योपैथ की शरण में हैं | आज सभी देश हैनिमन की जयंती को विश्व होम्योपैथिक दिवस के रूप में मना रहे है | मुख्य अतिथि मनोज जायसवाल ने कहा कि मेरे बाबा डॉ० भगवती प्रसाद जायसवाल बिना कोई शुल्क लिए मरीजों को दवा देते थे | उनकी पुस्तकें आज भी उनकी याद दिलाती हैं | विश्व में 62 प्रतिशत लोग होम्योपैथी इलाज पर भरोसा करते हैं | मेरा पूरा परिवार होम्योपैथी के दवाओं से परिचित हैं | उन्होंने जनता की सुविधा के लिए सबरी पर संचालित होम्यो चिकित्सालय के सौंदर्यीकरण का आश्वासन दिया | इसके साथ ही जनहित में सदैव सहयोग का भरोसा दिया | समारोह अध्यक्ष डॉ० गणेश प्रसाद अवस्थी ने कहा कि रोगों का कारण मन की विकृति होती हैं | मन ही बंधन और मुक्ति का साधन हैं | मन में विकृति का आना यह रोग का लक्षण हैं | होम्योपैथ में जब बतायें गये बिमारी की सटीक दवा मरीज को मिलती है तो उससे कई रोगों का निदान होता हैं | यह पद्धति रोगों को नष्ट कर व्यक्ति को स्वस्थ करती हैं | होम्योपैथी की दवाओं का शोध जानवरों पर नहीं बल्कि इंसानो पर किये जाने के कारण यह सबसे कारगर पद्धति है | संस्था अध्यक्ष डॉ० जे० एल० विश्वकर्मा ने हैनिमन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बीस वर्ष तक एलोपैथिक के सर्जन रहें हैनिमन ने अंग्रेजी दवाओं के साइड इफैक्ट को देखते हुए 1790 में रसायन शास्त्र का अध्ययन आरम्भ किया | सिलकोना वृक्ष की पत्ती चबाने पर मलेरिया की तरह जाड़ा देकर बुखार आने पर उन्होंने पाया कि विष ही विष का इलाज हैं | बाद में उन्हें होम्योपैथी का लेक्चरर नियुक्त कर दिया गया | एक राजा का इलाज करने पर उसने उनकी पहली पुस्तक का प्रकाशन 1828 में कराया | विशिष्ट अतिथि जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ० निर्मला पाण्डेय ने कहा कि आम जनता को सस्ती और सुगम इलाज की पद्धति होम्योपैथी हैं | केवल गुणों की खान होने मरीजों को तकलीफ से छुटकारा देने के कारण अब इसकी पैठ हर घर तक पहुँच गयी हैं | आगत अतिथिओं का स्वागत सुनील कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन अनंतांशु गोयल ने किया | इस मौके पर डॉ० आर० पी० सिंह, डॉ० मार्कण्डेय सिंह, एस० एन० चौबे, ऋषि शुक्ल, विशेश्वर जायसवाल, अशोक जायसवाल, गोवर्द्धन त्रिपाठी, विष्णु नारायण मालवीय, रोशन लाल, बच्चन राम कुशवाहा, पवन शुक्ल आदि उपस्थित थे |

Report by Nitin

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