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बारा गौरव सम्मान से नवाजी गईं शख्सियतें, हस्तियों का हुआ जमावड़ा

रविवार, 15 अप्रैल 2018 | Admin Desk

ग़ाज़ीपुर। ग्राम बारा स्थित गुलशन - ए - महमूद के प्रांगण में रविवार को बारा साहित्य मंच के तत्वावधान में 'बारा गौरव सम्मान' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में अपने कारनामों से ख्याति प्राप्त करने वाले विभूतियों को 'बारा गौरव सम्मान 2018' से सम्मानित किया गया।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीकांत पांडेय अपर जिला जज उतरा खण्ड और विशिष्ट अतिथि के रूप में नेसार खान पूर्व जज कोलकाता उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज मुस्लिम के तलवाते कलाम ए पाक से हुआ।   इस सम्मान समारोह में देश सेवा क्षेत्र में 1965 के पाक भारत युद्ध में शहीद ब्रहमदेव सिंह यादव के पुत्र जय सिंह यादव और आज़ाद हिन्द फौज के सिपाही जव्वाद खां के पुत्र इस्माइल खां को अपर जिला जज उत्तराखंड श्रीकांत पांडेय ने बारा गौरव सम्मान देकर सम्मानित किया। वहीं विक्टोरिया क्रास से सम्मानित हुमैल खां के पौत्र यहिया खां, तबारक हुसैन खां के पौत्र हाजी मंसूर खां, आलमीन खां के अलमास खां को बंगाल से रिटायर्ड जज नेसार खां ने सम्मानित किया। शिक्षा के क्षेत्र में गुलाम मजहर खान व डॉक्टर हैदर अली खान को पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने, समाज सेवा क्षेत्र में मौलाना अजीजुल हसन सिद्दीकी के पुत्र मौलाना सऊदल हसन सिद्दीकी को डॉक्टर अब्दुल हफीज इस्लामिक फाउंडेशन के संरक्षक सरवत महमूद खां ने सम्मानित किया। साहित्य के क्षेत्र में जैनुल आबेदीन खां व कुमार शैलेन्द्र को कवि अनन्त देव पांडेय ने और शायर सरफराज खां सरफ़राज़ को शायर शमीम गाजीपुरी ने सम्मानित किया। इतिहास के क्षेत्र में ओबैदुर्रहमान व सुहैल खां को एमएएच इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य खालिद अमीर ने सम्मानित किया। खेल के क्षेत्र में स्व0 आफताब खान के प्रतिनिधि के रुप में  पुत्र सरताज खां को  अल्प संख्यक आयोग के पूर्व सचिव मुहम्मद अकरम ने सम्मानित किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में मास्टर सलीम खान को कोलकाता में दैनिक अखबार के संपादक अब्दुल्लाह संजर ने सम्मानित किया। अब्दुल्लाह संजर व उर्दू के मशहूर संपादक हारून रशीद के प्रतिनिधि को मजहर मेमोरियल लाइब्रेरी एंड म्यूजियम के प्रबंधक एहतशाम हुसैन ने बारा गौरव सम्मान देकर सम्मानित किया।      

इससे पूर्व प्रोफेसर जुनेद हारिस ने बारा के इतिहास से जुड़े तथ्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बारा वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां पर राम के कदम पड़े हैं। उन्होंने कहा कि विश्वमित्र की नगरी बक्सर जाते समय इसी गांव के रास्ते राम गए थे। वहीं कर्मनाशा के तट पर हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ तो बारा के चौदह लोग शेरशाह सूरी का साथ दिए थे। उन्हों ने कहा कि बारा ही एक मात्र ऐसा गांव है जो सच्चर कमेटी के रिपोर्ट में शामिल नहीं है। यहां के लोग समृद्ध हैं। अंत में बारा साहित्य मंच के आयोजक सरवत महमूद खान ने सभी आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरवत महमुद खान ने और संचालन मोजाहिद खान ने किया। इस अवसर पर जिले भर से लोग भी संख्या में मौजूद थे।

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