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धर्म का आचरण करके ही पौरुष की प्राप्ति सम्भव : प्रो० सुधाकर मिश्र

बुधवार, 18 अप्रैल 2018 | Admin Desk

मीरजापुर | हमारी व्यवस्था मूर्खों नहीं हिन्दू संतानों के आचरण और व्यवहार की परिभाषा रूपी संविधान लिखने वाले ऋषि मुनि हैं, उनके बतायें गये रास्ते से विमुख होने के कारण समाज में उथल पुथल बना हैं | धर्म का आचरण करके हम पुनः पौरुषवान बनने की क्षमता रखते हैं | वेद स्पष्ट कहता है "धर्मो रक्षति रक्षितः" इसलिए तुम पहले अपने धर्म को जानो और उसका पालन करोगे तो धर्म भी तुम्हारी रक्षा करेगा |  उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदांत विभागाध्यक्ष प्रो० सुधाकर मिश्र ने व्यक्त किया | वह अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में नगर के लालडिग्गी स्थित बिड़ला सभागार में आयोजित परशुराम जयंती और सम्मान समारोह में बोल रहे थे | 

प्रो० मिश्र ने कहा कि हर इंसान जन्म से शूद्र होता हैं , संस्कार के द्वारा वह द्विज बनता हैं |  माँ के गर्भ से पैदा होने के बाद वह बारह वर्ष की आयु तक उसका दूसरा जन्म यज्ञोपवीत संस्कार से होता है तब उसे द्विज कहते है | संध्या वंदन के प्रति बढ़ती उदासीनता पर चिंता जताया | उन्होंने युधिष्ठिर के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार युधिष्ठिर नदी किनारे टहल रहे थे, एक ब्राह्मण स्नान करके निकला तब उन्होंने उनसे निमंत्रण का निवेदन किया | यह सुनते ही ब्राह्मण रोने लगे, उनके पास बैठकर युधिष्ठिर भी रोने लगे | काफी समय बीत जाने के बाद पाण्डव और श्रीकृष्ण उनके पास पहुंचे, रोने का कारण पूछा, सारी बात सुनकर श्रीकृष्ण भी रोने लगे, तब अर्जुन ने उनसे रोने का कारण पूछा, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि वह कलिकाल में ब्राह्मणों की दशा सोच कर रो पड़े | उन्होंने महिलाओं की चर्चा करते हुए कहा कि व्रत पूजन आधी आबादी करती हैं पर पुरुषों के पास संध्या करने का भी अवसर नहीं हैं  समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए उन्होंने संध्या वंदन करने के साथ ही धर्म पथ के अनुशरण पर बल दिया | 

संस्था के प्रदेश अध्यक्ष कैलाशनाथ द्विवेदी ने एक छत के नीचे जुटे सात संगठन के पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए शुभ संकेत बताया | डॉ० नीरज त्रिपाठी ने कहा कि  ब्राह्मण समाज अपनी मेधा शक्ति के बल पर अपना स्थान प्राप्त करता रहा हैं | उसे आरक्षण रूपी वैशाखी की आवश्यकता नहीं हैं | पं० बृजदेव पाण्डेय ने पितृभक्त भगवान परशुराम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने किसी समाज के नाश के लिए नहीं बल्कि आतताइयों के संहार के लिए शस्त्र उठाया था |  मालती त्रिपाठी ने एकजुटता पर जोर देते हुए आपन तेज सम्हारो आपे, तीनो लोक हांकते कांपे प्रसंग की चर्चा किया | कहा कि जब हम सब एक साथ होंगे तभी लक्ष्य को प्राप्त करेंगे | चंद्रलता उपाध्याय ने साधना के माध्यम से समाज को नयी दिशा देने का आह्वान किया | गंगा सागर दुबे ने कहा कि सब कुछ लूटा करके भी परोपकार करने वाला ब्राह्मण हैं | कार्यक्रम में कमलाकांत पाण्डेय, श्रीमती ममता शुक्ल, सूर्यप्रकाश शुक्ल, मंगला त्रिपाठी, हर्ष त्रिपाठी आदि ने विचार व्यक्त किया |

इस मौके पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की जिलाध्यक्ष श्रीमती चंद्रलता उपाध्याय, अखिल विश्व ब्राह्मण समाज एसोसिएशन की राष्ट्रीय महासचिव चित्रा पाण्डेय, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्र, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के महासचिव मंगला प्रसाद त्रिपाठी, अखिल भारतीय  ब्राह्मण एकता परिषद के जिलाध्यक्ष सूर्यप्रकाश शुक्ल, अखिल भारतीय ब्राह्मणसमाज कल्याण संस्थान भारत के अध्यक्ष नारायण जी उपाध्याय, तथा अखिल भारतीय ब्राह्मणसमाज कल्याण समिति के संगठन मंत्री विष्णुनारायण मालवीय को सम्मानित किया गया |  उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रभात दुबे, श्रीधर पाण्डेय, रत्नेश द्विवेदी, नितिन अवस्थी, अभिषेक तिवारी, हेमंत त्रिपाठी एवं राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय को सम्मानित किया गया | विशेष सम्मान पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व जीएम जीएस दुबे, बिन्नानी कालेज के पूर्व प्रवक्ता कमलाशंकर पाण्डेय, समाजसेवी रामेश्वर दुबे, सूर्यकान्त नाथ तिवारी, श्री के० के०  पाण्डेय , देव प्रकाश पाठक तथा लालगंज के ब्लाक प्रमुख महेंद्र गिरी को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया |    समारोह में डॉ० श्याम नारायण तिवारी, ज्ञान शंकर पाण्डेय, लल्लू तिवारी, ताराचंद द्विवेदी, डॉ० टी० एन० द्विवेदी, शशांक दुबे, श्रीमती रमा पाण्डेय, प्रदीप मिश्र, श्रीचंद अवस्थी, संदीप त्रिपाठी, दिनकर अवस्थी, प्रभाकर पाण्डेय,  नीरज द्विवेदी, राकेश शुक्ल, शेषमणि चौबे आदि आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे | पुरुषसूक्त का वाचन एवं शांतिपाठ पं० कृपाशंकर चतुर्वेदी तथा नितिन अवस्थी ने किया | श्रीचंद अवस्थी, संदीप त्रिपाठी, दिनकर अवस्थी आदि विद्वतजन ने किया |  कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवान परशुराम की चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया | समारोह की अध्यक्षता डॉ० गणेश प्रसाद अवस्थी और संचालन ऋषि शुक्ल ने किया ।

Report by Nitin

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