गाजीपुर। विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग एक बार फिर अधूरी रह गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के 2025-26 के बजट में इस मांग को नजरअंदाज कर दिया गया है। लहुरी काशी के नाम से प्रसिद्ध गाजीपुर में पिछले कई दशकों से यह मांग की जा रही है। स्थानीय छात्र नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विश्वविद्यालय निर्माण मंच के अध्यक्ष और पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ मजाक बताया है। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा महाविद्यालय होने के बावजूद विश्वविद्यालय न मिलना सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है। छात्र नेता आकाश चौधरी ने कहा कि गाजीपुर के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। छात्र नेता प्रकाश राय और अंकित भारद्वाज ने सरकार पर शिक्षा को बोझ समझने का आरोप लगाया है। कई सरकारें बदल गईं और अनेक जनप्रतिनिधि आए-गए, लेकिन गाजीपुर की यह प्रमुख मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है। छात्र नेता अमृतांश बिन्द ने इसे युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है। स्थानीय छात्रों में इस निर्णय को लेकर गहरा आक्रोश और निराशा है।
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