मिर्जापुर। जिले में पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने सर्व प्रथम माता विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। इसके बाद संगठन के लोगों के घर जाकर मुलाकात किया। विहिप के पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री अशोक सिंघल के अनन्य सहयोगी एवं राष्ट्रवादी मंच के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव के आवास पर लगभग40 मिनट रहे करीब 15 मिनट बंद कमरे में वार्ता किया।
मां के धाम में पहुंच कर उन्होंने बिना गर्भगृह में प्रवेश किए आदिशक्ति को नमन किया। तीर्थ पुरोहित रत्नाकर मिश्र ने तिलक, अंग वस्त्र और माला पहना कर रक्षा सूत्र बांधकर आशीष दिया। विहिप के पूर्व प्रांत संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव के लालडिग्गी स्थित आवास पर भव्य स्वागत किया गया। कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उन्होंने मंदिर की व्यवस्था के बारे में बताया।
कहा कि विवाह पंचमी 25 नवंबर को भगवान रामलला के मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया जाएगा। यह ध्वज 190 फीट ऊंचा होगा। जो दूर से ही नजर आएगा। मंदिर में समस्त निर्माण और बाउंड्री वाल को पूरा होने में करीब 2 वर्ष लगेगा। बाउंड्री कि लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर लंबी है। उन्होंने बताया कि 25 नवंबर को विवाह पंचमी के मौके पर एक-एक मंदिर भगवान शंकर, गणेश, हनुमान, सूर्य और माता अन्नपूर्णा का बनाया गया है । इसके साथ ही भगवान श्री राम सीता तीनों भाइयों और हनुमान के साथ एक मंदिर बना है। जो पंचमी को दर्शनार्थ खोल दिया जाएगा।
बताया कि इसी प्रकार महर्षि वाल्मीकि, विश्वामित्र, वशिष्ठ एवं ऋषि अगस्त्य का मंदिर बन रहा हैं। ऋषि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को रावण से युद्ध के पूर्व शस्त्र देने के साथ ही विजय का मंत्र दिया था । उन्हें बताया कि मंदिर परिसर में निषाद राज, शबरी और अहिल्या का भी मंदिर बन रहा है।
इसके साथ एक टीले पर विशाल जटायू की प्रतिमा स्थापित किया जा रहा है । जिसे किसी ने कहा नहीं था, लेकिन सीताहरण के दौरान वह आकाश में जाकर रावण से भिड़ गया। उसने भगवान को पूरी बात बताने के बाद ही दम तोड़ा था। राम सेतु का निर्माण में सहयोग करने आए गिलहरी को भी स्थापित किया जा रहा है। गोस्वामी तुलसीदास का भी मंदिर बनाया जा रहा है ।
उन्होंने बताया कि भगवान राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक 87 पैनल पत्थरों का लगाया जा रहा हैं। जिस पर जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के संदर्भों को उकेरा गया है। एक बार देखने मात्र से पूरी रामायण समझ में आ जायेगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भारतीय संस्कृति को दर्शाते 79 पैनल 6 फीट लंबा और 5 फीट ऊंचा धातु का पैनल लगाए जा रहे हैं। यह एक दर्शनीय स्थल होने के साथ ही शिक्षा का भी स्थल बनेगा ।
उन्होंने बताया कि लगाए गए पैनल उखड़ सकता हैं, लेकिन हवा धूप और पानी से खराब नहीं होंगे । मंदिर परिसर में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है । यात्रियों की सुविधा के लिए आम जनता के लिए टीन शेड लगाया गया है, जबकि वीआईपी के लिए कोई शेड नहीं है ।वह तो कार में आते हैं । चंपत राय ने बताया कि एसी हाल का निर्माण कराया गया है, जिसमें 1500 कुर्सियां रखी गई है । वहा आराम करने के साथ ही पानी, शौचालय एवं चिकित्सा की व्यवस्था किया गया है ।
उन्होंने कहा कि मंदिर दर्शन के लिए है पूजा के लिए नहीं । पूजा करेंगे तो गंदगी फैलेगी। माला फूल पैरों के नीचे पड़ेगा। लोग खाली हाथ आए लोग और दर्शन करें प्रसाद के रूप में लाची दाना मिलेगा । उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखा गया है कि सस्ता और खराब न होने वाला हितकारी प्रसाद लोगों को मिले । महासचिव ने बताया कि मंदिर परिसर में ऑडिटोरियम, एक छोटा अतिथि गृह, बाउंड्री वॉल एवं म्यूजियम समेत पांच काम चल रहे हैं । जिसे पूरा होने में करीब 2 साल लगेगा । पूरे मंदिर परिसर के 25 प्रतिशत भूभाग पर ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है ।
इस मौके पर रुद्र गोस्वामी, शुभम गुप्ता, रामकृष्ण गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता ,रवि पुरवार, मनोज दमकल,पंकज दुबे. नीरज त्रिपाठी, राजेश सिंहा , दीपक श्रीवास्तव, राजकुमार जायसवाल , अंकुर श्रीवास्तव आशीष पांडे , उदय गुप्ता, मनोज श्रीवास्तव, प्रमोद श्रीवास्तव, संजय सिंह , बबलू यादव , सतीश, राहुल तिवारी आदि उपस्थित रहें।






