ग़ाज़ीपुर। नगर पंचायत दिलदार नगर में स्थित फ़तेहपुर गांव के मूल निवासी, समाजवादी आंदोलन के योद्धा, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, कवि और ग़ज़लकार जनार्दन ज्वाला (75) का निधन बुधवार को तड़के हो गया. निधन की सूचना के पश्चात जनार्दन ज्वाला के फ़तेहपुर गांव स्थित आवास पर साहित्य, पत्रकारिता, चिकित्सा, शिक्षा, राजनीति सहित अन्य विधाओं की गणमान्य शख़्सियतों के साथ लोगों की भीड़ जुटने लगी. जनार्दन सिंह यादव साहित्य और पत्रकारिता जगत में जनार्दन ज्वाला उपनाम से रचनारत रह कर स्थापित थे. जनार्दन ज्वाला की अपने क्षेत्र में साहित्यिक और पत्रकार के रूप में महत्वपूर्ण उपस्थिति थी और पत्रकारिता जगत में अपने दौर के बेबाक़ और प्रतिबद्ध पत्रकारों में उनकी विशिष्ट पहचान थी. अपने दौर में वह लम्बे समय तक ग़ाज़ीपुर शहर से प्रकाशित खुल्लमखुल्ला अख़बार के लिए लिखते रहे. ग़ाज़ीपुर ज़िले के नामी-गिरामी पत्रकार रहे अभय नारायण के साथ उनका कार्य निर्वाह अनुकरणीय है. आधुनिक और जनवादी ग़ज़लों के लेखन में रुचि रखने वाले जनार्दन ज्वाला के पुत्र डॉ. विकास यादव बिहार राज्य के आरा स्थित वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं और पुत्र नवीन यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवारत हैं. दिलदार नगर में वैचारिक गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों और समाजवादी आंदोलन की गतिविधियों में पत्रकार जनार्दन ज्वाला मज़बूत स्तम्भ थे. सन् सत्तर के दशक में सामाजिक जीवन में पूर्ण रूप से सक्रिय होकर जनार्दन ज्वाला जीवन के अंतिम उच्चारण तक समाजवाद की प्रथम प्रस्तावना के साथ रहे. वे लोकबंधु राजनारायण के अनन्य अनुसरणकर्ता थे. जनार्दन ज्वाला जीवन भर देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विवेक सम्मत स्थापनाओं पर भरोसा करते रहे. जनार्दन ज्वाला के निधन के पश्चात वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक जागरण समूह में सम्पादक रहे जनवादी कवि, कई महत्वपूर्ण और दस्तावेज़ी पुस्तकों के ख्यातिलब्ध सम्पादक, लेखक और लोकतंत्र सेनानी धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव जनार्दन ज्वाला को अपना अग्रज और मार्गदर्शक मानते हैं. उन्होंने कहा कि जनार्दन ज्वाला जीवन की अंतिमा तक जनपक्षीय अवधारणा को जीते रहे और अपनी स्वस्थ वैचारिकी को तर्कसम्मत विस्तार दिया. आपातकाल के विरुद्ध उनकी वैचारिक सक्रियता ने क्षेत्र के जन समाज को तर्कों के आधार पर चैतन्य रूप में समृद्ध बनाया. जनार्दन ज्वाला के बाद उनकी पीढ़ी के रूप में उनके पुत्र डॉ. विकास यादव समाजवादी विचारधारा को बौद्धिक विस्तार दे रहे हैं. लेखक तौसीफ़ गोया ने जनार्दन ज्वाला को जनपक्ष का दक्ष अभिभावक बताया. कई पुस्तकों के ख्यातिलब्ध लेखक और मशहूर शायर ख़ुर्शीद दिलदारनगरी ने जनार्दन ज्वाला के बारे में कहा कि उन्होंने विचारों को तथाकथित आडम्बर से मुक्त किया और उसके व्याकरण को आम आदमी के पक्ष का व्याकरण बनाने के लिए जीवन भर प्रयासरत रहे. बुधवार को जनचिंतक जनार्दन ज्वाला की अंतिम यात्रा में ग़ाज़ीपुर के सांसद अफ़ज़ाल अंसारी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका, ज़मानियां विधायक ओमप्रकाश सिंह के प्रतिनिधि मन्नू सिंह, इंद्रजीत सिंह, नगर पंचायत दिलदार नगर अध्यक्ष अविनाश जायसवाल, पूर्व चेयरमैन अलीशेर राईनी उर्फ़ भोलू, ग्राम प्रधान दिलदार नगर सत्येन्द्र यादव उर्फ़ गुदरी, पूर्व प्रधान रणजीत यादव, डॉ. सत्यम मणि, लेखक तौसीफ़ गोया, सपा विधानसभा अध्यक्ष अनिल यादव, ज़िला पंचायत सदस्य आकाश यादव, प्रवीण सिंह यादव मुलायम, रिशु यादव, रमीज़ रज़ा, रामदयाल पासवान, बल्ली सिंह यादव, इंद्रासन यादव, मिथिलेश यादव, हाजी शमीम अहमद ख़ान, मास्टर जिउत यादव, ओमप्रकाश यादव, सुनील यादव, ज़िला पंचायत सदस्य बंगाली यादव सहित विशाल जनसमूह उपस्थित रहा. दाह संस्कार ज़मानियां के बड़ेसर स्थित दैत्यरा बाबा घाट अंत्येष्टि स्थल पर किया गया.
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