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गांधी जी के बताये गये मार्ग पर चलकर ही लोगों के बीच आपसी प्रेम-सौहार्द बढ़ा‌या जा सकता- डॉ0वीरेन्द्र यादव

ग़ाज़ीपुर। 2 अक्टूबर को राष्‍ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्मोत्सव बड़ी धूम-धाम से लुटावन ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशन, सकरा जैतपुरा, गाजीपुर में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर सम्मिलित हुए संस्था के प्रबंधक एवं जंगीपुर विधान सभा के विधायक डॉ. वीरेन्द्र यादव ने महात्मा गांधी के जीवन पर रोशनी डालते हुए उनके संघर्षों, कार्यक्रमों एवं उनके द्वारा किये गये समाज सुधार के प्रयासों पर पर्याप्त रोशनी डाली। उन्होने कहा कि महात्मा गांधी केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि उससे कहीं अधिक एक संत राजनेता थे। उन्होंने राजनीति में हमेशा अपने विरोधी विचारधारा के लोगों को सम्मान दिया, उन्हें आगे बढ़ाया। उदाहरण के तौर पर जवाहर लाल नेहरू एक समाजवादी विचारधारा के समर्थक के तौर पर तो वहीं सरदार बल्लभ भाई पटेल दक्षिणपंथी विचारधारा के तौर पर जाने जाते थे। इसके बावजूद दोनों अपने को गांधी का शिष्य कहते थे। गांधी भी दोनों को राजनीति में आगे बढ़ाने का कार्य किया. गांधी स्वयं हिन्दू संस्कृति के समर्थक होने के बावजूद कभी श्री दक्षिण- पंथी पटेल की जगह समाजवादी नेहरू को प्रधानमंत्री के रूप में देखना स्वीकार किया। 1946-47 के दौरान जब भारत सांप्रदायिक दंगों से गुजर रहा था, हिन्दू-मुसलमान दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये थे। इसे रोकने में कांग्रेस, अंग्रेज एवं अन्तरिम सरकार पूरी तरह असफल हो गई. गांधी ने स्वयं इसे रोकने का निर्णय किया बिना सरकारी सहयोग के वे बिहार, कलकत्ता, लाहौर एवं करायी गये. वहां लोगों से मिले, उनको समझाया, रैली की, आमरण अनशन तक चले गये। उनके इन्हीं प्रयासों को देखकर तत्कालीन वायसराय एवं गवर्नर-जनरल लार्ड माउण्टबेटन ने उन्हें ‘वन मैन बाउंड्री फोर्स” कहा था। डॉ. वीरेन्द्र यादव ने आगे कहा कि वर्तमान परिवेश में नफरती राजनीति के चलते विरोधी विचारधारा के नेताओं को सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके फसाया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है। इससे वर्तमान सरकार को बाहर निकलना चाहिए। उसे गांधी से यह सीख लेनी चाहिए की कि किसी कैसे अपने विरोधियों से वैचारिक मतभेद रखें मन का भेद नहीं. यह देश, समाज और संस्कृति के लिये अच्छा नहीं है। इससे पूरे राष्ट्र को हानि होगी, देश में की एकता पर गंभीर चोट होगी। कालान्तर में इस नफरती राजनीति का परिणाम अत्यन्त भयावह होगा। लोगों के बीच आपसी वैमनस्यता बढ़ती चली जायेगी। गांधी का एक मात्र दर्शन है जो इस समस्या से बाहर निकालेगा। गांधी के बताये गये मार्ग पर चलकर ही लोगों के बीच आपसी प्रेम-सौहार्द बढ़ा‌या जा सकता है। गांधी आज के परिवेश में सबसे अधिक प्रासंगिक हैं, क्योंकि वह मानवीय मूल्यों को समझने में सबसे सफल व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने समाज में नैतिक आदर्श को उच्च बनाये रखने के लिये राजनेताओं के सम्मुख ‘रामराज्य’ की अवधारणा दी है। उन्होंने ऐसा मार्ग सुझाया है जिसपर चलने से गरीबों, दलितों, मजदूरों एवं आदिवासी लोगों को लाभ मिलेगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामाकान्त शुक्ला ने किया। वहीं, मुख्‍य वक्तव्य डॉ. सुभाष ने दिया और संचालन का कार्य शोधार्थी सुभाष सिं‍ह कुशवाहा ने किया। इस कार्यक्रम में संस्था के अजय यादव, अरुण यादव, राकेश यादव, विनयकांत तिवारी, आनन्द कुमार, उपेन्द्र यादव, मनीष यादव, प्रियंका शर्मा, पंकज कुमार, जितेन्द्र यादव, प्रेम नाथ यादव, अभय श्रीवास्तव, आशीष राय आदि लोगों ने सहभागिता की।


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