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देश ने 2014 के बाद एक निर्णायक परिवर्तन देखा- डॉ. संगीता बलवन्त

ग़ाज़ीपुर। आज सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने विचार रखते हुए राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवन्त ने कहा कि यह संबोधन केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं, बल्कि उस भारत की गूंज है जो न रुकता है, न झुकता है और न डरता है। महामहिम राष्ट्रपति जी के दूरदर्शी अभिभाषण के लिए सदन के माध्यम से हृदय से धन्यवाद व्यक्त की। कहा कि राष्ट्रपति ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष, गुरु तेगबहादुर के 350वें शहीदी पर्व, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती तथा भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी का स्मरण कर राष्ट्र की आत्मा और उसके महान पूर्वजों को नमन किया। यह संदेश स्पष्ट है कि पूर्वजों का स्मरण ही राष्ट्र को शक्ति और दिशा देता है। आज देश ने 2014 के बाद एक निर्णायक परिवर्तन देखा है। यह परिवर्तन सत्ता का नहीं, बल्कि कार्य संस्कृति का है। नीति-पंगुता और तुष्टिकरण की राजनीति से निकलकर भारत निर्णय, नीयत और नतीजों की राजनीति की ओर बढ़ा है। बीते एक दशक में लगभग 25 करोड़ नागरिकों का गरीबी रेखा से बाहर आना परिणाम आधारित सुशासन का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों को गरिमा के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला। जल जीवन मिशन के माध्यम से करोड़ों परिवारों तक नल से जल पहुँचा। पारदर्शी शासन व्यवस्था के तहत कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचा। किसान, महिला, युवा और मध्यम वर्ग—हर वर्ग के लिए ठोस कार्य हुए। रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन, किसानों को सीधी सहायता, महिलाओं की उपलब्धियाँ, युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार के नए अवसर—यह नया भारत है। स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्रांति और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाए हैं। आज भारत सिर्फ चलता नहीं, दौड़ता है। यह सरकार घोषणाओं की नहीं, डिलीवरी और विश्वास की सरकार है, और अगले 25 वर्षों के सशक्त भारत की नींव रख रही है।


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