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ईश्वर का स्मरण करना ही जीवन की सार्थकता है: दयावती बाई जी

गाजीपुर : विकास खण्ड सादात के सलेमपुर बघाई गांव स्थित चन्द्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज में रविवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।कथा के प्रथम दिन भागवत महात्म्य, भक्त चरित्र और सुंदर भजन प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रख्यात समाजसेवी व आध्यात्मिक धर्म गुरु सतपाल जी महाराज की शिष्या एवं हंस योग आश्रम गाजीपुर से आई दयावती बाई ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र से ही मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है।उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर अपने सद्धर्मों को भूल जाता है। बाल्यावस्था से लेकर मृत्यु तक मनुष्य सांसारिक सुख-सुविधाओं और क्षणिक भोग-विलास में उलझकर अमूल्य मानव जीवन को नश्वर बना देता है। जबकि इस शरीर में सांस है, तब तक अच्छे कर्म और ईश्वर का स्मरण करना ही जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मानव जीवन देकर हमें परमात्मा की भक्ति करने, सत्कर्म करने और मोक्ष प्राप्त करने का सर्वोच्च अवसर प्रदान किया है. यह दुर्लभ मनुष्य जन्म केवल खाने-पीने या भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर को जानने और उनसे नाता जोड़ने के लिए मिला है।श्रीमद्भागवत कथा जीवन की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट करती है, इसलिए जहां भी भागवत कथा का आयोजन हो, वहां श्रद्धापूर्वक उसका श्रवण अवश्य करना चाहिए। इससे न केवल व्यक्ति, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियां समाप्त होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।उन्होंने कहा कि मानव जीवन सबसे श्रेष्ठ योनि मानी गई है। इसी योनि में जन्म लेकर मनुष्य ईश्वर की भक्ति कर सकता है, यही कारण है कि देवता भी मानव जन्म की कामना करते हैं।इस अवसर पर त्रिर्थराज प्रयाग से महात्मा श्री सारथानंद ,काशी से महात्मा श्री सुजाता बाई जी, एवं हरिद्वार से महात्मा श्री चन्द्रभानानंद , किशोर यादव, उमेश सिंह, कृपाशंकर राय,राजन पांडेय, अशोक राजभर आदि उपस्थित रहे कार्यक्रम के आयोजक डा.संतोष यादव ने इस पवित्र कार्य में सबको आकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया


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