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विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने किया जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन

गाजीपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कमेटी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन मंगलवार को आयोजित किया गया। पार्टी की प्रमुख मांगों में मर्जर किए गए प्राथमिक विद्यालयों को बहाल करना शामिल है। अब तक बंद किए गए 26,000 प्राथमिक विद्यालयों और मर्जर किए गए 5,012 विद्यालयों को फिर से खोलने की मांग की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में पार्टी ने नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग की है। साथ ही प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था करने पर जोर दिया है। पार्टी ने शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध किया है। सोनभद्र जिले में आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों के हितों को ध्यान में रखते हुए कैमूर विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में बंगला और उर्दू भाषी लोगों पर हो रहे अत्याचार रोकना, अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक विवाहों को मान्यता देना शामिल है। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई रोकने की भी मांग की गई है। कोल, धरकार, मुसहर जैसी वनवासी जनजातियों को संविधान की अनुसूची-5 में शामिल करने और उन्हें जंगलों से बेदखल न करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है। पार्टी ने शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। सोनभद्र में आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों के विकास के लिए कैमूर विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की गई है। साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को बंद करने और धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर की कार्रवाई रोकने की मांग भी शामिल है। धारा 132 की जमीनों पर रह रहे लोगों की बेदखली रोकने और उजड़े लोगों के पुनर्वास की मांग की गई है। पार्टी ने बंगला और उर्दू भाषियों को बंगलादेशी और पाकिस्तानी बताकर की जा रही प्रताड़ना पर रोक लगाने की मांग की है। कम्युनिस्ट पार्टी ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार रोकने की मांग की है। अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक विवाहों को मान्यता और प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव रखा है। कोल, धरकार, मुसहर जैसी जनजातियों को संविधान की अनुसूची 5 में शामिल करने की मांग की गई है। वन विभाग द्वारा वनवासी जनजातियों की प्रताड़ना रोकने और उन्हें उनकी जमीन का मालिकाना हक देने की मांग भी की गई है।


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