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राज्यसभा में सांसद डॉ.संगीता बलवंत ने उठाया गाजीपुर अफीम फैक्ट्री का मुद्दा

ग़ाज़ीपुर। आज सदन में जनपद गाजीपुर स्थित ऐतिहासिक अफीम एवं क्षारोद कारखाने के विषय में ध्यान आकर्षित करते हुए डॉ संगीता बलवंत राज्यसभा सांसद ने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि गाजीपुर की पहचान, किसानों की आजीविका और देश की औषधीय आवश्यकता से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है। सन् 1820 में ब्रिटिश काल में मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर लगभग 45 एकड़ भूमि में स्थापित यह कारखाना देश की धरोहर है। पूरे भारतवर्ष में अफीम फैक्ट्री केवल दो स्थानों पर हैं—एक मध्य प्रदेश के नीमच में तथा दूसरी उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में। यह तथ्य स्वयं इस कारखाने के महत्व को रेखांकित करता है। यहाँ निर्मित अफीम का उपयोग दर्द निवारक एवं जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण में किया जाता है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। लगभग 30 वर्ष पूर्व यह कारखाना पूर्ण क्षमता से सुचारू रूप से संचालित होता था, जिससे जनपद गाजीपुर के किसानों की आय में वृद्धि होती थी और स्थानीय लोगों को व्यापक स्तर पर रोजगार प्राप्त होता था। किन्तु वर्तमान में स्थिति चिंताजनक है। पूर्व की अपेक्षा अब केवल लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन ही किया जा रहा है। यह न केवल औद्योगिक क्षति है, बल्कि किसानों और श्रमिकों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। अतः आवश्यक है कि इस कारखाने का आधुनिकीकरण करते हुए इसे जीएमपी (Good Manufacturing Practices – अच्छी विनिर्माण प्रक्रियाएं) मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। साथ ही, जनपद गाजीपुर में अफीम की खेती को पुनः प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। राज्य सभा सांसद डॉ संगीता बलवंत ने सदन के माध्यम से गाजीपुर स्थित इस ऐतिहासिक अफीम एवं क्षारोद कारखाने के आधुनिकीकरण तथा संबंधित किसानों की खेती को पुनर्जीवित करने की पुरजोर मांग की। यह केवल एक उद्योग का प्रश्न नहीं, बल्कि गाजीपुर के विकास, किसानों की समृद्धि और देश की औषधीय आत्मनिर्भरता का विषय है। जनहित से जुड़े मुद्दे डॉक्टर संगीता बलवंत जी सदैव से सदन में उठाती रही है।


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